रत्नेश्वर महादेव मंदिर वाराणसी
काशी के कण-कण में एक एक रहस्य भरा हुआ है कही तिल -तिल बढ़ते हुए तिलभांडेश्वर तो कहीं करीब 400 सालों से 9° पर झुके हुए रत्नेश्वर महादेव।
उनमें से एक थे मान सिंह।उनका एक सेवक था जिसके मन में था कि वह अपने मां के दूध का कर्ज उतार दे इसीलिए वह अपनी मां के नाम से एक शिव जी का मंदिर बनाने लगा उसने बनारस के मणिकर्णिका घाट को चुना ।सेवक ने मंदिर बनवाने के लिए राजस्थान से कारीगरों को बुलाया और अपनी शक्ति के अनुसार मंदिर को जितना अच्छा बनवा सकता था उतना अच्छा बनवाया। मंदिर बन ने के पश्चात वो अपने माँ को लेकर मंदिर गया और वहाँ जाके अपनी माँ से बोला - माँ ये लो मैंने ये मंदिर बनवा के तुम्हारे दूध का कर्ज उतार दिया । ये सुनके उसकी माँ बहुत ही दुखी हो गयी और बिना मंदिर के अंदर गय ही वापस जाने लगी तब उस सेवक ने कहा कि - माँ अंदर जाकर मंदिर के दर्शन नही करोगी । माँ ने कहा - बेटा तुम एकबार मंदिर देख लो जब सेवक ने मंदिर देखा तो मंदिर झुक गया था । उसकी माँ का नाम रत्ना होने के कारण इस मंदिर को रत्नेश्वरी महादेव कहा गया । इसके अलावा भिन्न-भिन्न तरह की और भी कहानिया कही जाती है ।इस मंदिर में भगवान शिव के रूप में शिवलिंग स्थापित किया गया है जो कि जमीन के 10 फीट नीचे है. हालांकि, यह मंदिर साल में 8 महीने गंगाजल से आधा डूबा हुआ रहता है और 4 महीने पानी के बाहर. इसके कारण इस मंदिर के गर्भ गृह में कभी भी भगवान शिव के दर्शन नहीं हो पाता है. वह मिट्टी में दबे ही रहते हैं.यह मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) शहर मे मणिकर्णिका घाट के समीप दत्तात्रेय घाट पर स्थापित है। मंदिर पर अद्भुत शिल्प कला की गई है । आश्चर्य है कि उस समय मशीनों की अनुपस्थिति में भी इतनी खूबसूरत कला की गई ।
अगर आप वाराणसी आये और इस मंदिर के भी दर्शन अवश्य करें । और इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये । हर हर महादेव ।
Loved it.. keep it up and come with more new and special stories 😇😇😇
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